Anaamang - Ik Khuda Mera Bhi...

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दुनिया, एक स्थान, जहां ईश्वर अपने बनाए हुए खिलौनों से खेलता है। इंसान के रूप में हम सब अपनी राह चलते हैं और सबके अपने अनुभव होते हैं। किसी के भी अनुभव को गलत नहीं कहा जा सकता।

 

जीवन के अनुभवों से गुजरते हुए इस जन्म मुझे लगा कि ईश्वर को हम जिस रूप में देखते हैं, वह मुझे वैसा मिला ही नहीं।

 

उस शक्ति को मैं इक भाव के रूप में महसूस कर पायी। जिंदगी के अनगिनत पहलूओं से गुजरते हुए, उस परमात्मा की सृष्टि के करीब हो पायी। सबसे खूबसूरत उसकी कृति एक औरत के रूप मे उसका भाव कैसे जगा पाई। इस पर आधारित यह किताब।

 

धरती के जीवों और रूह या वायु का अद्भुत संगम एक इंसान के जीवन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, शुक्रिया मैं अवसाद में रही, इस दुनिया मे होकर भी इस दुनिया की रही

लेखक के बारे में: सतना (मध्य प्रदेश) में जन्मी मीनू कौर, साधारण सी गृहिणी, पिछले अट्ठाईस सालों से लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में अपना आशियाना बनाए हुए हैं। बेइंतहा विश्वास ख़ुदा और उसके इश्क पर, जिसने आज फ़िर इस खूबसूरत लम्हे से उसे नवाज़ा। किसी भी भाषा पर कोई पकड़ नहीं और ही बहुत सारी डिग्रियाँ। ज़िंदगी में बस एक पकड़ - कभी किसी का दिल दुखाने वाली बात करे।

हम सब की जीवन यात्रा अलग है। हमें कैसे जीना है हमें भी पता नहीं होता। पर हममें शायद एक आदत होती है दूसरे पर उंगली उठाने की। सारा जीवन गलत सही के फेर में ही रहते हैं।

  • Paperback: 74 pages
  • Publisher: White Falcon Publishing; 1 edition (April 2024)
  • Author: Meenu Kaur
  • ISBN-13: 9798892222730
  • Product Dimensions: 5 x 8 Inches

Indian Edition available on:

  


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